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मुनीर आर्मी को बड़ा झटका: बलूच लड़ाकों ने पाकिस्तान सेना से छीने दो जिले, केच और पंजगुर पर कब्जा

मुनीर आर्मी को बड़ा झटका: बलूच लड़ाकों ने पाकिस्तान सेना से छीने दो जिले, केच और पंजगुर पर कब्जा
न्यूज़ डेस्क :  WATAN KI HIFAZAT (WKHNEWS24.COM)

भारत से बढ़ते सैन्य तनाव के बीच पाकिस्तान सेना और सरकार को बलूचिस्तान में करारा झटका लगा है। पाक आर्मी चीफ असीम मुनीर की रणनीति पर सवाल उठते जा रहे हैं, क्योंकि बलूच लड़ाकों ने पाकिस्तान की सेना को हरा कर बलूचिस्तान प्रांत के केच और पंजगुर जिलों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है। यह घटना पाकिस्तान के लिए एक और आंतरिक विफलता का प्रमाण बनकर उभरी है।

बलूच लड़ाकों का हमला : केच और पंजगुर पर कब्जा

बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, बलूच लड़ाकों ने शुक्रवार को एक साथ कई मोर्चों पर हमले तेज कर दिए। केच, पंजगुर और लासबेला जिलों में न केवल पाकिस्तान सेना को हराया गया, बल्कि वहां मौजूद सरकारी इमारतों, थानों और दफ्तरों को भी आग के हवाले कर दिया गया।

केच में नाकेबंदी के बाद सीधा हमला

बलूच लड़ाकों ने सबसे पहले इलाके की नाकेबंदी की। इसके बाद थानों और सरकारी दफ्तरों पर धावा बोला। पाक सेना और प्रशासनिक अधिकारियों को पीटकर भगाया गया। फिर लड़ाकों ने इलाके को ‘स्वतंत्र क्षेत्र’ घोषित कर दिया। पंजगुर में भी दोहराया गया वही मंज़र। भारी हथियारों के साथ आए लड़ाकों ने पहले नाकेबंदी की।फिर पाकिस्तानी सैनिकों पर हमला कर उन्हें खदेड़ दिया। पंजगुर अब बलूच लड़ाकों के नियंत्रण में बताया जा रहा है।

लासबेला में भी हिंसा, तीन लोगों की हत्या

लासबेला जिले में बलूच लड़ाकों ने प्रदर्शनकारियों की हत्या कर स्पष्ट संदेश दे दिया कि अब किसी भी सरकारी विरोध को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। तीन लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जो पाकिस्तानी सेना की मदद कर रहे थे।

पाकिस्तान सरकार की विफल नीति, विद्रोह थामने में असमर्थ

बलूच विद्रोह को दबाने में असफल पाकिस्तान सरकार ने अब 150 बलूच आंदोलनकारियों को रिहा करने का फैसला किया है। यह कदम हालात को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया गया, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि विद्रोह की आग और भड़क गई है। बलूचिस्तान के साथ-साथ खैबर पख्तूनख्वा और गिलगित-बाल्टिस्तान में भी विद्रोह की आहट है।

पूर्व गृह मंत्री फजलुर रहमान की चेतावनी

पूर्व गृह मंत्री फजलुर रहमान ने सरकार को आगाह किया है कि अगर सेना को पूरी तरह भारत सीमा पर भेजा गया, तो देश के भीतर कौन हालात संभालेगा? उनका सीधा आरोप है कि सरकार अंदरूनी संकटों को नजरअंदाज कर रही है और भारत से टकराव को प्राथमिकता दे रही है।

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