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Hornbill Festival: हॉर्नबिल महोत्सव भारत की सांस्कृतिक समृद्धि का सशक्त प्रतीक- पीएम मोदी

Hornbill Festivalहॉर्नबिल महोत्सव भारत की सांस्कृतिक समृद्धि का सशक्त प्रतीक- पीएम मोदी

Hornbill Festival: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नागालैंड के हॉर्नबिल महोत्सव की सराहना की है और इसे भारत की सांस्कृतिक समृद्धि तथा जनजातीय विरासत की चिरस्थायी जीवंतता का सशक्त प्रतीक बताया है। पीएम मोदी ने रविवार को सोशल मीडिया एक्स पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा एक अखबार में हॉर्नबिल महोत्सव को लेकर लिखे गये लेख को साझा किया है और इसकी प्रशंसा करते हुए इसे भारत की सांस्कृतिक समृद्धि तथा जनजातीय विरासत की चिरस्थायी जीवंतता का एक शक्तिशाली प्रतीक बताया है।

उन्होंने कहा कि आज पूर्वोत्तर एक नये, आत्मविश्वासी भारत का चेहरा प्रस्तुत करता है। नागालैंड की अनूठी सांस्कृतिक पहचान की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह राज्य केवल एक महोत्सव की मेज़बानी नहीं करता, बल्कि स्वयं में एक उत्सव का प्रतीक है, जो ‘त्योहारों की भूमि’ के गौरवशाली नाम को सही सिद्ध करता है।

रंग और प्राचीन तथा आधुनिकता के अद्भुत समन्वय

सिंधिया ने एक अंग्रेजी अखबार में नागालैंड के हॉर्नबिल महोत्सव (Hornbill Festival) में पूर्वोत्तर की झलकियां नाम से एक लेख लिखा है, जिसे श्री मोदी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर साझा किया है। श्री मोदी ने लिखा कि नागालैंड का हॉर्नबिल महोत्सव मानवीय भावना के विविध रंग और प्राचीन तथा आधुनिकता के अद्भुत समन्वय के रूप में चित्रित करता है।

प्रधानमंत्री के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए सिंधिया ने कहा कि पीएम मोदी के ‘एक्ट ईस्ट’ विजन ने आसियान व्यापार गलियारों में लगभग 10 बिलियन डॉलर का रास्ता खोला है, जिससे नगालैंड इस क्षेत्र की विकास गाथा में एक प्रमुख प्रवेश द्वार बन गया है। सिंधिया ने कहा कि ऐसे समय में जब दुनिय भर के देश सांस्कृतिक पहचान के महत्व को फिर से समझ रहे हैं, हॉर्नबिल फेस्टिवल परंपरा में निहित एकता के एक अग्रणी उदाहरण के रूप में सामने आता है।

नागालैंड की लड़ाकू जनजातियों का सबसे बड़ा उत्सव

उन्होंने कहा, “जब हमारा पूर्वोत्तर प्रकाशमान होगा, तभी समूचा राष्ट्र उन्नति की ऊंचाइयों को छूएगा।” उल्लेखनीय है कि नागालैंड की समृद्ध संस्कृति और जीवन शैली को प्रस्तुत करने वाला यह महोत्सव नागालैंड की लड़ाकू जनजातियों का सबसे बड़ा उत्सव है। इसे ‘त्योहारों का त्योहार’ भी कहा जाता है। इस हर साल एक से 10 दिसंबर यानी दिसंबर माह के प्रथम सप्ताह में मनाया जाता है।

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